Category: Hindi Kahaniya

Story for kids Hindi | Tiger Story in Hindi

Story For Kids Hindi – Greed of A Tiger | बाघ का लालच – बच्चो की कहानी

Story For Kids Hindi | Tiger Story Hindi : त्रिपुरा के जंगलों में एक जंगली मादा सूअर थी. वह अपने बच्चों के साथ खुशी से रहते थी . एक दिन, जब वह जंगल में अपने बच्चों के लिए भोजन के लिए खोज रही थी. उसने एक झाड़ी के पास एक रोते हुए बाघ शावक (बाघ का छोटा बच्चा) को देखा. शावक की मां का कोई निशान नहीं मिला तो उसने सोचा कि लगता है बाघिन को किसी शिकारी द्वारा मार डाला गया है. मां सुअर को शावक पर दया आ गयी. उसने सोचा की ‘मैं कैसे ऐसी हालत में इस अनाथ शावक छोड़ सकती हु. आखिर मैं एक माँ हूँ...

Motivational story in hindi

Motivational Story in Hindi – True Friendship सच्ची दोस्ती

आज आपके लिए Motivational Story in Hindi – True Friendship सच्ची दोस्ती की हिंदी कहानी पब्लिश कर रहे है. सच्ची दोस्ती – Inspirational & Motivational Story in Hindi एक दो हमशक्ल दोस्त थे प्रेम और मंगल. प्रेम पुलिस वाला था और मंगल डाकू था. पुलिस वाले और डाकू में गहरी दोस्ती थी. जो डाकू था वो सभी डाकुओं से ब्बिल्कुल्ल अलग था. वो उन लोगो को पकड़ता था जो दुसरे पे जुल्म्म करते थे. वह उन मुजरिमों को पकड़कर प्रेम को सौप देता था पर लोगो को लगता था की मुजरिमों को प्रेम पकड़ता था. एक बार मंगल ने डाकुओं के सरदार को पकड़कर जेल में बंद करा दिया .और...

Swami-Vivekananda-in-Hindi-Story-Thoughts

Thoughts of Swami Vivekananda in Hindi | स्वामी विवेकानंद

Thoughts of Swami Vivekananda in Hindi स्वामी विवेकानंद की जीवनी कथा और उनके अनमोल विचार बचपन का नाम – बिले पूरा नाम – नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त पिता का नाम – विश्वनाथ दत्त माता का नाम – भुवनेश्वरी देवी जन्म तारीख – 12 जनवरी 1863 जन्म का स्थान – कलकत्ता (पश्चिम बंगाल), भारत देश Biography of Swami Vivekananda in Hindi स्वामी विवेकानंद की जीवनी विवेकानंद के बचपन का नाम बिले था. बिले के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था. इनका जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था. साल की यह संक्रांति बहुत पवित्र मानी जाती है. उस दिन लोग गंगा स्नान के लिए जाते है....

King Stories in Hindi Raja ki Kahaniya

Ek Raja ki Kahani | राजा रानी की कहानी भाग-2

यह Ek Raja ki Kahani है. इसके पिछले भाग में आपने राजा और उसकी दो रानियों की कहानी (Story of king and queen) पढ़ी थी उसी कहानी के भाग -२ को हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है- अगर आपने अभी तक कहानी का भाग -१ नहीं पढ़ा है तो आप कहानी – Raja Rani ki Kahani Part-1 पढ़े. एक राजा की कहानी / Raja Rani ki Kahani Part-2 उधर जंगल में फेंके गए नवजात बच्चे भूख प्यास से तड़प रहे थे और जोर जोर से रो रहे थे. वही पास में एक सन्यासी रहते थे. उन्हें बच्चो के रोने की आवाज़ सुनाई दी जब उन्होंने खोजबीन की तो उन्हें दो...

Pauranik Katha | Ek Hindi Kahani

Ek Pauranik Katha | महर्षि च्यवन की पौराणिक कहानी

Ek Pauranik Katha – महर्षि का मूल्य प्राचीन काल की एक पौराणिक कहानी है की भृगु के पुत्र च्यवन महर्षि एवम् बड़े ही तपस्वी थे. एक बार उन्होंने एक बड़ा व्रत लेकर जल के भीतर तपस्या करने का संकल्प लिया. अपने सारे दुर्गुणों और सुखों का परित्याग करके वो 12 तक जल समाधी में रहे. महर्षि च्यवन की तपस्या Pauranik Katha महर्षि के ऐसे स्वभाव व तपस्या को देखकर सभी जलचर प्राणी उनके मित्र बन गए थे. सारे जल के जीवों को उनसे कोई डर नहीं लगता था. एक बार च्यवन महर्षि ने बहुत ही श्रृद्धा से गंगा-यमुना के संगम के जल के भीतर प्रवेश किया. वो कभी जल समाधी लगा लेते...

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Hindi story – सच्चे सुनार की परिभाषा | Hindi Laghu Katha

Hindi story – कहानी – सच्चे सुनार की परिभाषा Baat bahut purani hai. Ek gaun me Sunaar rahata tha. Uske char bete the. Ek din Sunaar ne apne charo beto ko bulaya or puchha- tum sabko malum hai, sachche Sunaar ki paribhasha? Bade bete ne kaha – ‘Jo bachaye rupye me se chaar aane, ham sachcha Sunaar usi ko mane’. Manjhale ne kaha – ‘sachcha Sunaar vah haijo pachas paise khud ki jeb me dale or pachas (50) hi paye’. Sanjhale ne kaha,’bilkul nhi’. Sachcha Sunaar vahi jisaka sapna yhi ki rupye me barah aane apna’. Ab bari thi chhote ki. Usne pte ki bat kahi-‘rupye ka rupye bhi le...

hindi kahani with moral - Ghamandi Talwar

Hindi Kahani with Moral – घमंडी तलवार – एक शिक्षाप्रद कहानी

Hindi Kahani with Moral – घमंडी तलवार राजा विश्वजीत (Raja Vishwajeet) विश्व-विजय का सपना देख रहा था । वह अपने नाम के अर्थ को सार्थक करना चाहता था । उसके पास एक ऐसी शुभ तलवार और ढाल थी कि यह जो भी युद्ध लड़ता सफलता अवश्य ही मिलती । इसलिए वह अपनी तलवार (sword) को जी-प्यान से चाहता था । विश्वजीत सुबह-शाम अपनी तलवार को पूजा करता और उसे माथे से लगाकर म्यान में रखता । किन्तु वह अपनी ढाल का सम्मान इतना नहीं करता था जितना कि वह तलवार को इज्जत देता था । एक रात तलवार और ढाल को नीद नहीं आ रही थी। तलवार ने घमण्ड में...

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