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Dhanteras 2018 | धनतेरस क्या है, कब है & क्यों मनाते हैं ?

दोस्तों इस पोस्ट में धनतेरस क्या है (What is Dhanteras 2018)? कब है (When is Dhanteras in 2018) ? धनतेरस क्यों मनाया जाता है? धनतेरस पूजा का शुभ महूर्त  & पूजा विधि-क्या है? इन सवालों के जवाब और जानकारी देंगे.

Dhanteras Date, Puja, Mahurat in Hindi

धनतेरस क्या है? What is Dhanteras in Hindi

धनतेरस यानी दीवाली से एक दिन पहले की जाने वाली पूजाIndia में दीवाली (Diwali 2018) से एक दिन पहले धनतेरस पूजा का बहुत महत्व है। इस दिन लक्ष्मी- गणेश के साथ ही कुबेर की भी पूजा अर्चना की जाती है। धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। जो कि समुंदर मंथन के समय अपने हाथों में अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे, यही कारण है की भगवान धनवंतरी को औषधि का जनक भी कहा जाता है। धनतेरस वाले दिन सोना चांदी खरीदना शुभ माना जाता है । तो साथ ही इस दिन धातु खरीदने का भी चलन है।

धनतेरस क्यों मनाया जाता है? Story of Dhanteras in Hindi?

शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी समुन्द्र मंथन से अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे जिसने देवताओं को अमर बना दिया था। कहा जाता है कि धनवंतरी भगवान के 2 दिन बाद ही देवी लक्ष्मी भी प्रकट हुईं थीं इसी कारण दिवाली से पहले धनतेरस मनाया जाता है।

धनतेरस से जुड़ी एक दूसरी कथा (Another Story) यह भी है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन गुरु शुक्राचार्य देवताओं के कार्य में बाधा डाल रहे थे जिसके बाद क्रोध में आकर भगवान विष्णु ने उनकी एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार देवताओं को राजा बलि के डर से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए थे।

वामन रूप में होने के बाद भी शुक्राचार्य ने भगवान विष्णु को पहचान लिया था और राजा बलि से आग्रह किया कि यह वामन कुछ भी मांगे इन्हें इनकार कर देना।

शुक्राचार्य के समझाने के बाद भी राजा नहीं माने और वामन द्वारा मांगी गयी तीन पग ज़मीन के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। जब शुक्राचार्य ने देखा की राजा उनकी बात नहीं मान रहे हैं तो उन्होंने लहू का रूप धारण किया और राजा के कमंडल में घुस गए। शुक्राचार्य के ऐसा करते ही कमंडल से जल निकलना बंद हो गया। भगवान उनकी चाल को अच्छी तरह से समझ गए और उन्होंने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमंडल में इस तरह से रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फुट गयी।

इसके बाद भगवान वामन ने अपने एक पैर से पूरी पृथ्वी नाप ली और दूसरे पैर से पूरा अंतरिक्ष, जब तीसरा पग रखने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं बची तो राजा बलि ने अपना सिर उनके आगे कर दिया। ईसी तरह से राजा बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिल गयी और उन्होंने जो भी संपत्ति देवताओं से छीनी थी उसका कई गुना देवताओं को मिल गया। कहा जाता है कि इसी खुशी में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

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धनतेरस पूजा का शुभ महूर्त Kya Hai?

धनतेरस के दिन पूजा करने का बहुत महत्व है लेकिन ज़रूरी यह है कि हम सही महूरत पर पूजा करें ताकि हमारी पूजा सफल हो और हमें उसका लाभ मिल सके।

Dhanteras 2018 - Puja Vidhi, Mahurat, Timing Details for Diwali in Hindi

1- प्रषोद काल: (Dhanteras Date & Time)

सूरज डूबने के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रषोदकाल के नाम से जाना जाता है। ईस काल में दीपदान और लक्ष्मी पूजा करना शुभ माना जाता है।

दिल्ली में 5 नवम्बर को सूर्यास्त समय शाम 7:30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में स्थित  लग्न 6:10 बजे से लेकर 8:09 तक वृषभ लग्न रहेगा। मुहूर्त समय में पूजा होने के कारण घर परिवार में लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

2- चौघडिया मुहूर्त:

Dhanteras Date : 5 नवम्बर 2018

अमूत काल मुहूर्त 4:30 बजे से लेकर 6:00 बजे तक
चर 6:59 से लेकर 7:30 तक।

उपरोक्त में लाभ समय में पूजा करना लाभों में वृद्धि करता है। शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन , स्वास्थ्य और आयु में शुभता आती है। अमूत काल में पूजा करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।

धनतेरस पूजा विधि-

स्कन्दपुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रषोदकाल में दरवाजे पर यमराज के लिए दिप जला कर रखें। माना जाता है कि दरवाजे पर यमराज के लिए दिया जलाने से अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। ईस दिन पूरे विधि विधान के साथ देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। घर में लक्ष्मी जी के वास के लिए इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा करना अनिवार्य है।
दीपदान करते समय मंत्रों का उच्चारण करें।

धनत्रयोदशी मंत्र-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥

मंत्र का अर्थ-

त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं।

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धनतेरस पूजा का महत्व (Dhanteras Significance)

धनतेरस पूजा की ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है वह तेरा गुना बढ़ जाती है। इसलिए लोग स्वस्थ जीवन की कामना के लिए देवताओं के चिकित्सक भगवान धनवंतरी की पूजा करते हैं। यही कारण है कि इस दिन कोई भी शुभ काम करने पर उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन चांदी, सोने के सिक्के, बर्तन गहने खरीदने का अधिक महत्व है। धन की प्राप्ति के लिए इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और पूजा अर्चना के बाद 13 दिए जलाने का भी अलग ही महत्व है। जिस से माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद सब पर बना रहता है।

धनतेरस में क्या करें खरीदारी?

इस दिन लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी गणेश की पूजा करने से मनुष्य को कभी भी धन और वैभव की कभी भी कमी नहीं होती है। इस दिन लोग दिल खोल कर खरीदारी करते हैं क्योंकि धनतेरस के दिन खरीदारी को शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन बर्तनों और गहनों की खरीदारी को और भी शुभ माना जाता है।

धनतेरस के दिन खरीदी जाने वाली विशेष चीज़ें-

1- बर्तन
2- चांदी के लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति
3- कुबेर जी की प्रतिमा
4- लक्ष्मी या श्री यंत्र
5- कौड़ी और कमल गट्टा

Conclusion about Dhanteras 2018: 

अगर आप भी माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद चाहते हैं, और चाहते हैं कि आपके घर परिवार में सुख शांति बनी रहे और हमेशा धन की वर्षा होती रहे तो धनतेरस के दिन पूरे दिल माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा अर्चना करें। साथ ही दिल खोल कर खरीदारी करें ताकि आपके घर में कभी किसी भी चीज़ की कमी न हो।

दोस्तों उम्मीद है यह information about धनतेरस क्या है (What is Dhanteras 2018)? कब है (When is Dhanteras in 2018) ? धनतेरस क्यों मनाया जाता है? धनतेरस पूजा का शुभ महूर्त  & पूजा विधि-क्या है? पसंद आयी होगी और आपको इस के ज़रिये धनतेरस की बहुत सी जानकारी प्राप्त हुई होगी।  इस लेख के बारे में अपनी राय हमें कमेंट करके बताइए और इस पोस्ट को फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मीडिया में जरूर share करें.

आपको धनतेरस और दिवाली की बधाइयाँ.

Raj Dixit

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