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Hindi Kahani with Moral – घमंडी तलवार – एक शिक्षाप्रद कहानी

hindi kahani with moral -घमंडी तलवार

Hindi Kahani with Moral – घमंडी तलवार

राजा विश्वजीत (Raja Vishwajeet) विश्व-विजय का सपना देख रहा था । वह अपने नाम के अर्थ को सार्थक करना चाहता था । उसके पास एक ऐसी शुभ तलवार और ढाल थी कि यह जो भी युद्ध लड़ता सफलता अवश्य ही मिलती । इसलिए वह अपनी तलवार (sword) को जी-प्यान से चाहता था । विश्वजीत सुबह-शाम अपनी तलवार को पूजा करता और उसे माथे से लगाकर म्यान में रखता ।

किन्तु वह अपनी ढाल का सम्मान इतना नहीं करता था जितना कि वह तलवार को इज्जत देता था । एक रात तलवार और ढाल को नीद नहीं आ रही थी। तलवार ने घमण्ड में ढाल से कहा,”देखो खाल, राजा विश्वजीत मुझ से अधिक प्रेम करते हैं और मुझे ज्यादा सम्मान देते हैं . तुम्हारा तो वे ध्यान भी नहीं रखते । जबकि युद्ध मैदान में एक हाथ में तुम रहती हो और एक हाथ में मैं रहती हूँ । इसका अर्थ यह हुआ कि तुमसे ज्यादा मेरा महत्त्व है”.

ढाल ने बडी सहजता से जवाब दिया, “तलवार बहिन तुम्हारा काम है लोगों को मारना उनकी जान लेना, जबकि मेरा काम है जान बचाना । किसका कितना महत्व है ये तो समय ही बतायेगा” ।

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एक बार राजा विश्वजीत को एक बड़ा युद्ध लड़ना पड़ा, युद्ध भूमी में शत्रु रोना के कूछ सैनिकों ने राजा विश्वजीत को ढेर दिया । वे राजा पर प्रहार पर प्रहार किये जा रहे थे । राजा विश्वजीत भी बडी बहादुरी से ढाल को सामने करके उनके प्रहारों को रोक रहे थे । अचानक एक भाले के प्रहार से राजा की तलवार के दो टुकडे हो गये. राजा घबरा गये, र्कितु बडे साहस के साथ ढाल से प्रहारों को रोकते हुए वे युद्ध मैदान से भाग निकले ।

राजा को पराजय का मुंह देखना पड़ा । उन्होंने हार का कारण तलवार को माना , क्योकि वह युद्ध के दौरान टूट गयी थी. किंतु ढाल की उन्होंने
बडी सराहना और प्रशंसा को । वे जानते थे कि यदि आज़ ढाल नहीं होती तो निश्चित रूप से प्रहारों के कारण खरोंचे आ जाती.

उसी रात तलवार दर्द के मारे कराह रही थी, तो ढाल ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘तलवार बहिन क्या हुआ..राजा ने आज तुमहे एक कोने में तड़पने के लिए क्यों छोड़ दिया । आज तुम्हे पता भी चल गया कि युध्द के समय कौन महत्वपूर्ण होता है ?’

“ढाल बहिन क्यों ताने मार रही हो. . . . मेरा तो अंग-भंग हो गया । मुझे ठीक करवाने के बजाय राजा ने मुझे एक कोने में रोने के लिए छोड़ दिया है.’ तलवार ने दर्द भी शब्दों में कहा ।

‘मैं तुम्हे ताने नहीं मार रही हूँ बहिन सीख दे रही हूँ । युद्ध में तलवार और ढाल दोनों का बराबर का महत्व होता है । जैसे आज तुम्हारे दो टुकडे हो गये तो राजा को जान मेरे कारण बची । मैं नहीं होती तो उनके प्राण चले गये होते और पहले भी मैंने कहा था कि तुम प्राण हरने का काम करती रही हो और मैं प्राण बचाने का काम करती रही, और किसी ने कहा भी है- मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता हैं….

ढाल बहिन तुम्हारी सीख मुझे समझ में आ गई । मुझे क्षमा कर देना, उम दिन मैंने घमण्ड में तुम्हे ‘भला-बुरा कह दिया था । उस घमण्ड के कारण ही मैरा ये हाल हुआ है ।’ तलवार ने ढाल की बात काटते हुए कहा ।

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Moral of Hindi Story

  • इस प्रकार राजा विश्वजीत विश्वविजेता बनने से चूक गया और तलवार का घमण्ड भी चूर-चूर हो गया.
  • हमें घमंड नहीं करना चाहिए क्योकि घमंड इंसान को अँधा कर देता है और उसका विनाश होजाता है.

दोस्तों यह कहानी Hindi Kahani with moral – Arrogant sword गोविन्द जी ने लिखी है. अगर आपके पास कोई कहानी है और उसे प्रकशित करवाना चाहते है तो एहम भेजिए.

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Raj Dixit

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1 Response

  1. Nice story, keep posting

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